जय माता दी
गया न कोई खाली
हाथ जोड़ तू भी विनती करले
भरेगी तेरी झोली।।
दूर दूर तक नजर ना आए
जब कोई भी सहारा
तूझको याद नही अबभी
मैय्या को कब तू पुकारा
तेरे बिगडे काम बनाने
तेरा सोया भाग जगाने
मैय्या दौडी चली आएगी
तू करले एक जयकारा।।
कोई ना थामे हाथ तेरा
जब ठोकर लग जाए
फिरता यहाँ वहाँ ना जाने
दर दर हाथ पसारे
अपनी मैय्या को एक बार
जो तूने पूकारा होता
मैय्या दौडी चली आएगी
तू करले एक जयकारा।।
मन अपने ठान ले तू
मैय्या को अपना जान ले
अपना पराया कोई नही
मैय्या को अपना मान ले
सुख दुख अपना भूल कर
मैय्या का गुणगान ले
मैय्या दौडी चली आएगी
तू करले एक जयकारा।।
जयकारा मेरी मैय्या का
बोल साचे दरबार की जय
जय माता दी
आशुतोष पाण्डेय