सवालों की रहगुजर से
जबाबों के मोड़ तक
गर इश्क हो बदनाम तो
कोई बात नही
उठने लगे गर ऊंगलियां
रिश्तों की पाकिजगी पर
उस मोड़ से फिर एक बार
मुड़ जाना जरूरी है।।
दोस्ती का हर रूतबा
इनायते खुदा है
हर जज्बा मोहब्बत का
रहमते खुदा है
तारीख है गवाह सदियों से
मोहब्बत हुई कुर्बान
कुर्बानी दी है दोस्ती ने
यह है दोस्ती की शान ।
आशुतोष पाण्डेय
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