शनिवार, 12 अगस्त 2017

जिंदगी

_*जिंदगी*_
बहुत अरसे से हमको आजमा रही है जिंदगी
अपने हर रूप दिखा रही है जिंदगी।।
हमको नही थी पहचान अपने पराए की
पर हर किसी से पहचान करा रही है जिंदगी।

गौर ना किया कभी जिंदगी के पहलुओं पर
मुड़ मुड़ के देखना मेरी आदत नही
सोचा ना था कभी इस मोड़ से देखुॅगा इसे
हर मोड़ पर हमको घुमा रही है जिंदगी।।

कुछ मेरे ऊसूल थे कुछ लोगों के कानून
कुछ हसरतें मेरी कुछ ख्वाहिशें सबकी
कुछ करम अपना भी कुछ सबकी इनायतें
अब जा कर जीना सिखा रही है जिंदगी।।

आशुतोष पाण्डेय��

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