कितना खुन बहेगा
और कब तक खुन बहेगा
पूछ रही है हर माता
हाथों में अस्थी कलश लेकर
चुन चुन कर खत्म करो गद्दार
अब तो जागो मेरे यार।।
बलिदानों की धरती पर
व्यर्थ ना जाए ये बलिदान
शीश शत्रु का मांग रहा
फिर से आज हिंदुस्तान
इसका बदला ना ले पाए
तो जीना है बेकार।।अब तो जागो मेरे यार।।
छुपे हुए इन गद्दारों को
ऐसा सबक सिखाना है
भारत का खुन सफेद नहीं
यह उनको बतलाना है
आतंकी आकाओं को
कर देना है तार-तार।।अब तो जागो मेरे यार।।
आशुतोष पाण्डेय।।
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