अपने अपने हिस्से का प्यार
सबने छुपा कर रखा है
कुछ प्यार मोहब्बत की बातें
कुछ नफरत वाली सौगातें
कुछ अनचाहे जजबातो को
सबने दबा कर रखा है ।।
कुछ अनकही सी यादें
कुछ भुली बिसरी सी बातें
कुछ अपनों की कुछ बेगानों की
कुछ गुजरे हुए जमाने की
कुछ पल सुनहरे वादों के
सबने संजो कर रखा है।।
कुछ हुए उजागर अपनों में
कुछ रह गए बस सपनों में
कुछ बन कर शुल चुभते हैं
कुछ फुल बन कर झरते है
कुछ ऐसी अनचाही चाहत को
सबने गला घोंट कर रखा है।।
कुछ कहा सुनी हमरी तुमरी
कुछ तीखे बान शब्दों के
कुछ किस्से कुछ किरदारों के
कुछ भुले हुए वादों के
एक छोटी सी महाभारत को
मन में लिख कर रखा है।।
आशुतोष पाण्डेय