मंगलवार, 19 सितंबर 2017

जय माता दी

 
माता रानी के दरबार से
गया कोई खाली
हाथ जोड़ तू भी विनती करले
भरेगी तेरी झोली।।
दूर दूर तक नजर ना आए
जब कोई भी सहारा
तूझको याद नही अबभी
मैय्या को कब तू पुकारा
तेरे बिगडे काम बनाने
तेरा सोया भाग जगाने
मैय्या दौडी चली आएगी
तू करले एक जयकारा।।
कोई ना थामे हाथ तेरा
जब ठोकर लग जाए
फिरता यहाँ वहाँ ना जाने
दर दर  हाथ पसारे
अपनी मैय्या को एक बार
जो तूने पूकारा होता
मैय्या दौडी चली आएगी
तू करले एक जयकारा।।
मन अपने ठान ले तू
मैय्या को अपना जान ले
अपना पराया कोई नही
मैय्या को अपना मान ले
सुख दुख अपना भूल कर
मैय्या का गुणगान ले
मैय्या दौडी चली आएगी
तू करले एक जयकारा।।
जयकारा मेरी मैय्या का
बोल साचे दरबार की जय
जय माता दी
आशुतोष पाण्डेय

सोमवार, 18 सितंबर 2017

यादें

जब घुमता हूँ शहर की तपती सड़क पर
गाँव की वह पगडंडी बहुत याद आती है।
जब जब अकेले में रोता हूँ
माँ की लोरी बहुत याद आती है।
मिलती नही है जब धूप में कही छाया
दूर कहीं एक अमराई बहुत याद आती है।
दौड़ते दौड़ते जब थक जाते हैंपाँव
दादी की नसीहत ही पुचकारती है ।
भरी भीड़ मे जब अकेला होता हूँ
दोस्तों के किस्से बहुत याद आते हैं। 
किस लिए दौड़ रहें हैं सभी
बिना किए परवाह किसी की
कहीं तो होगा मुकाम
इस अनचाही दौड़ का विराम
आ जाते हैं जब आँख में आंसु
बाबुजी का गमछा बहुत याद आता है।
आशुतोष पाण्डेय